शुक्रवार, फ़रवरी 13, 2026

श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज

 


श्रद्धेय संत श्री रामसुखदास जी महाराज (1904–2005) 20वीं सदी के महान संत, गीता-प्रवक्ता और साधक थे। वे अपनी सरल भाषा, गहरी भक्ति और व्यावहारिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए पूरे भारत में पूज्य माने जाते हैं।
आपका जन्म 1904 में हुआ आपका परिवार राजस्थान के सीकर क्षेत्र से था, उनके परिवार की अधिक जानकारी हम नहीं बता सकते हैं क्योंकि संत श्री परिवार को नहीं, प्रभु को महत्वपूर्ण बिंदु मानते रहे थे।

" जाति न पूछो संत की, पूछ लिजिए ज्ञान।
मोल कीजिए तलवार का, पड़ी रहन दे म्यान।।"

बचपन से ही वैराग्य और भक्ति की प्रवृत्ति थी।

आप अधिकांश समय गीता प्रेस, गोरखपुर से जुड़े रहे थे, २० वीं सदी के मुख्य टीकाकार, व्याख्याता, अनुवादक और संपादक रहे हैं।
संत श्री ने 2005 में लगभग 101 वर्ष की आयु में अपनी देह का त्याग करके प्रभु में विलीन हो गए।

स्वामी जी की प्रमुख विशेषताएँ
श्रीमद्भगवद्गीता के अद्भुत व्याख्याकार
अत्यंत सरल और सीधे शब्दों में उपदेश
“भगवान की शरणागति” पर विशेष बल
स्वयं को कभी गुरु नहीं मानते थे—सबको भगवान की ओर प्रेरित करते थे ।
अपना फोटो लेने के सख्त खिलाफ थे क्योंकि शरीर हर क्षण अपना चित्र बदल रहा है तो, फोटो का क्या मतलब, वो तो पुराना हो गया, इस बात पर भी अपने ग्रंथों में बहुत विस्तार में लिखा गया है।

स्वामी जी के प्रमुख ग्रंथ
“साधक संजीवनी” (गीता पर टीका)
“मानव जीवन का लक्ष्य”
“प्रेम की महिमा”
अन्य अनेक भक्ति और साधना संबंधी पुस्तकें (गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित)

स्वामी जी का मुख्य संदेश
“भगवान हमारे हैं और हम भगवान के हैं — यह दृढ़ विश्वास ही मुक्ति का मार्ग है।”

वे कहते थे कि
जप, स्मरण और भगवान पर भरोसा रखो
अपने कर्तव्य को भगवान को अर्पित भाव से करो
एक बार किसी भक्त ने उनसे पूछा –
“महाराज जी, भगवान मिलेंगे कैसे?”
महाराज जी ने बहुत सरल उत्तर दिया –
“भगवान को पाना कठिन नहीं है, कठिन है अपनी जिद छोड़ना।”
वे समझाते थे कि, 
हम भगवान से भी अपनी इच्छा पूरी करवाना चाहते हैं।
लेकिन सच्ची भक्ति है — “हे प्रभु, जो आपको ठीक लगे वही कीजिए।”
वे कहते थे कि जब मनुष्य अपनी चिंता भगवान को सौंप देता है, तभी शांति आती है।

स्वामी जी का मुख्य उपदेश

१. भगवान अपने हैं
वे बार-बार कहते थे:
“भगवान हमारे हैं — यह मान लो, फिर डर किस बात का?”
२. चिंता मत करो
चिंता को वे अविश्वास मानते थे।
कहते थे —
चिंता = भगवान पर भरोसे की कमी
३. कर्तव्य करो, फल छोड़ो
गीता का सार वे बहुत सरल शब्दों में बताते थे:
अपना काम ईमानदारी से करो
परिणाम भगवान पर छोड़ दो

स्वामी जी द्वारा बताई गई साधना की सरल विधि

वे कठिन तपस्या नहीं बताते थे।
साधारण गृहस्थ के लिए कहते थे, 
सुबह उठते ही भगवान का स्मरण
दिन भर काम करते हुए नाम जप
रात को सोते समय धन्यवाद
बस — इतना ही काफी है 
उनकी एक बहुत प्रसिद्ध पंक्ति
“भगवान को पाने के लिए कुछ नया करने की जरूरत नहीं,
जो गलत है उसे छोड़ दो — भगवान मिल जाएंगे।”

मैं आपको संत श्री महाराज से जुड़ी एक प्रेरक कथा और उनका मुख्य साधना-संदेश बताता हूँ।

सच्चा समर्पण क्या है? (एक प्रसंग)

एक बार किसी भक्त ने उनसे पूछा –
“महाराज जी, भगवान मिलेंगे कैसे?”
महाराज जी ने बहुत सरल उत्तर दिया –
“भगवान को पाना कठिन नहीं है, कठिन है अपनी जिद छोड़ना।”
वे समझाते थे, 
हम भगवान से भी अपनी इच्छा पूरी करवाना चाहते हैं।
लेकिन सच्ची भक्ति है — “हे प्रभु, जो आपको ठीक लगे वही कीजिए।”
वे कहते थे कि जब मनुष्य अपनी चिंता भगवान को सौंप देता है, तभी शांति आती है।

 स्वामी श्री रामसुख दास जी महाराज की पुस्तकों की सूची

श्रीमद्भगवद्गीता (साधक संजीवनी) – विस्तृत गीता टीका/परिशिष्ट सहित 
गीता प्रबोधनी गीता का टीका/व्याख्या 
भक्ति पूजा 
शरणागति रहस्य – भक्ति/समर्पण-आधारित ग्रंथ 
जीवन का कर्तव्य – जीवन-धर्म पर मार्गदर्शन 
धर्मक्षेत्र
सुंदर समाज का निर्माण 
कल्याण श्रीभगवत कृपा अंक – धर्म/भक्ति सम्बन्धी अंक/रचना
लक्ष्य अब दूर नहीं – उद्देश्य/साधना पर विचार 
साधन सुधा सिंधु – साधना-मार्ग का संकलन 
परमपिता से प्रार्थना – प्रणाम/आध्यात्मिक याचना 
भगवान आज ही मिल सकते हैं – भक्ति-आत्मा सम्बन्धी ग्रंथ 
सच्चा गुरु कौन? – गुरु-तत्व की व्याख्या 
मूर्तिपूजा और नामजप – नाम-जप व पूजा की महत्ता 

अंग्रेज़ी पुस्तके भी हैं 

Sadhak Sanjivani (set of 2)
Be Good
For Salvation of Mankind
Is Salvation Not Possible without a Guru
Discovery of Truth and Immortality
Art of Living
The Drops of Nectar
Ease of God Realization
Benedictory Discourses
Let Us Know the Truth
Sahaj Sadhana
The Divine Name
How to Lead a Household Life
Invaluable Advice
Way to Attain Supreme Bliss
All is God (special edition)

महत्वपूर्ण जानकारी

स्वामी रामसुख दास जी महाराज गीता प्रेस गोरखपुर से जुड़े हुए बहुत प्रसिद्ध संत और टीकाकार थे। 
उनकी अधिकांश पुस्तकें धर्म, भक्ति, जीवन-मार्ग, साधना और गीता-व्याख्या पर आधारित हैं। 
स्वामी जी अपने आप को कभी गुरु नहीं मानते थे, इसलिए अपने नाम में दास लगाते थे।
आप कहते थे कि, मेरे जाने के बाद मेरी सारी वस्तुओं को भी मेरे साथ जला देना, मेरे नाम से कोई स्थान या चिन्ह बना कर पूजना मत, मेरे प्रवचनों को जीवन में काम लेते रहना।

स्वामी जी का मुख्य मंत्र 

"हे नाथ! मैं तुझको भूलूं नहीं "

तो दोस्तों कैसी लगी मेरे द्वारा दी गई, स्वामी जी के बारे में जानकारी ।
मेरे दिल के अपने कोने में सम्मान के साथ आज भी स्वामी जी गुरु की भूमिका में विराजते हैं, मैं दंडवत हूं ।

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