गुड़ामालानी और धोरीमन्ना अब बालोतरा जिले में शामिल
पश्चिमी राजस्थान में बाड़मेर बालोतरा जिलों की सीमाओं में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव
पश्चिमी राजस्थान में जिला पुनर्गठन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। भजनलाल सरकार ने गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंडों को बाड़मेर जिले से हटाकर बालोतरा जिले में शामिल कर दिया है। यह बदलाव 31 दिसंबर की रात जारी अधिसूचना के माध्यम से किया गया, जो नए साल की शुरुआत में सार्वजनिक हुआ।
इस फैसले के बाद पश्चिमी राजस्थान की प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं को फिर से निर्धारित किया है। इसके तहत:
गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड अब आधिकारिक रूप से बालोतरा जिले का हिस्सा होंगे
वहीं बायतु उपखंड को बालोतरा से हटाकर बाड़मेर जिले में वापस शामिल किया गया है
इस पुनर्गठन के बाद अब बालोतरा जिले के उपखंड
बालोतरा
सिणधरी
सिवाना
गुड़ामालानी
धोरीमन्ना
बाड़मेर जिले के उपखंड
बाड़मेर
बायतु
शिव
चौहटन
सेड़वा
गुढ़ामलानी (अन्य क्षेत्र)
रामसर (आदि)
सरकार का क्या कहना है?
राज्य सरकार का कहना है कि यह निर्णय बेहतर प्रशासन, विकास कार्यों की गति और जनता को सुविधाजनक सेवाएँ देने के उद्देश्य से लिया गया है। यह बदलाव जिला पुनर्गठन से जुड़ी समितियों की सिफारिशों में संशोधन के रूप में किया गया बताया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, नए जिलों को प्रभावी बनाने के लिए सीमाओं में यह बदलाव जरूरी था।
अचानक बदलाव पर क्यों मचा विवाद?
यह फैसला 31 दिसंबर 2025 की देर रात जारी किया गया, जिस कारण राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल खड़े हो गए।
कई स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे प्रशासनिक दूरी बढ़ेगी
सरकारी कार्यालयों, कलेक्ट्रेट और अन्य विभागों तक पहुंच अब पहले से अधिक दूर हो सकती है
कुछ जनप्रतिनिधियों ने इसे राजनीतिक लाभ-हानि से जुड़ा फैसला बताया है
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह निर्णय बिना पर्याप्त जन-सुनवाई के लिया गया।
अब आगे बदलाव क्यों नहीं होंगे?
महत्वपूर्ण बात यह है कि जनगणना 2027 को देखते हुए जनवरी 2026 से मई 2027 तक जिलों की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
इसका मतलब है कि,
👉 गुड़ामालानी और धोरीमन्ना का बालोतरा में शामिल होना अब स्थायी माना जाएगा।
जनता और राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव का प्रभाव कई स्तरों पर दिखेगा
स्थानीय लोगों की रोज़मर्रा की प्रशासनिक जरूरतों पर असर
विकास योजनाओं और बजट वितरण में बदलाव
विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीतिक गणित पर प्रभाव
आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि यह फैसला जनता के लिए सुविधाजनक साबित होता है या असुविधाजनक।
गुड़ामलानी को बालोतरा में जोड़ना क्या मंत्री के के विश्नोई का राजनीतिक कद वाकई बढ़ा?
राजस्थान में नए ज़िलों के गठन और सीमाओं में बदलाव केवल प्रशासनिक फैसले नहीं होते, बल्कि वे गहरे राजनीतिक संकेत भी देते हैं। गुड़ामलानी और धोरीमन्ना को बाड़मेर से अलग कर बालोतरा ज़िले में शामिल करना ऐसा ही एक फैसला है, जिसने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में गुड़ामलानी विधायक राज्य मंत्री के के विश्नोई का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। सवाल यह है कि—क्या इस फैसले से वास्तव में के के विश्नोई का राजनीतिक कद बढ़ा है?
प्रशासनिक फैसला या राजनीतिक रणनीति?
सरकारी तौर पर इसे प्रशासनिक सुविधा, विकास और बेहतर शासन से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन राजनीति में कोई भी बड़ा भू-प्रशासनिक बदलाव बिना राजनीतिक गणित के नहीं होता। गुड़ामलानी और धोरीमन्ना जैसे क्षेत्र सामाजिक संरचना, वोट बैंक और नेतृत्व के लिहाज़ से बेहद अहम हैं। इन्हें बालोतरा में जोड़ना सीधे तौर पर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है।
के के विश्नोई की भूमिका और उभरती छवि
इस फैसले के बाद के के विश्नोई को उस नेता के रूप में देखा जाने लगा है, जो सरकार से निर्णय करवा सकता है। स्थानीय स्तर पर यह संदेश गया कि विश्नोई केवल भाषण देने वाले नेता नहीं, बल्कि परिणाम दिलाने वाले नेता हैं।
बालोतरा ज़िले का विस्तार हुआ
नए प्रशासनिक ढांचे में विश्नोई समर्थक इलाकों की हिस्सेदारी बढ़ी
और उनका प्रभाव क्षेत्र पहले से अधिक संगठित दिखाई देने लगा
राजनीति में perception यानी धारणा बहुत मायने रखती है, और इस फैसले ने विश्नोई के पक्ष में धारणा को मज़बूत किया है।
समर्थन के साथ असंतोष भी
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही अहम है। गुड़ामलानी क्षेत्र में एक वर्ग ऐसा है जो अब भी बाड़मेर से जुड़ाव को अपनी पहचान मानता है।
जिला बदलने से प्रशासनिक दूरी
ऐतिहासिक और भावनात्मक असंतोष
और स्थानीय मुद्दों के हाशिए पर जाने की आशंका
अगर इन सवालों का समाधान नहीं हुआ, तो यही असंतोष भविष्य में राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
चुनावी कसौटी अभी बाकी
राजनीतिक कद का असली पैमाना चुनाव होते हैं।
क्या विश्नोई इस फैसले को वोटों में बदल पाएंगे?
क्या पंचायत और विधानसभा स्तर पर उनका प्रभाव बढ़ेगा?
या विरोधी दल इस असंतोष को मुद्दा बनाकर फायदा उठाएंगे?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिलेंगे।
गुड़ामलानी को बालोतरा में जोड़ने से मंत्री के के विश्नोई का कद निश्चित रूप से बढ़ा है, खासकर क्षेत्रीय प्रभाव और नेतृत्व की छवि के स्तर पर। लेकिन यह बढ़त अभी संभावना की अवस्था में है, स्थायी राजनीतिक ताकत में बदलने के लिए ज़मीनी संतुलन और चुनावी परिणाम निर्णायक होंगे।
राजस्थान की राजनीति में यह फैसला आने वाले वर्षों में कई नए समीकरण गढ़ सकता है—और विश्नोई उन समीकरणों के अहम केंद्र बने रहेंगे।
अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं।
निष्कर्ष
गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा जिले में शामिल करना राजस्थान के जिला पुनर्गठन की प्रक्रिया का एक अहम अध्याय है। जहां सरकार इसे प्रशासनिक सुधार बता रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह बदलाव जमीनी स्तर पर कितना कारगर साबित होता है।
आपकी राय भी जरूरी है इसलिए कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं।


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